किसान नेता "महेन्द्र सिंह टिकैत" के जन्मदिवस (6 अक्टूबर 1935) की शुभकामनायें

किसान नेता "महेन्द्र सिंह टिकैत" के जन्मदिवस (6 अक्टूबर 1935) की शुभकामनायें ।

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  1. तुलसीदास के समय में शायद अहीर ,गुजर और जाट शिख्सा और धर्म से दूर रहे होंगे तभी उन्होंने लिखा होगा "जो अहीर पिंगल पढ़े तउ तीन गुण हीन, उठिबो ,बैठिबो ,बोलिबो लियो विधाता छीन" मगर अचरज की बात है कि उन्हीं के काल में एक ब्रह्मज्ञानी संत हुए हैं जिनके शरीर की जाती "जाट" थी! वो थे संत श्री दादू दीन दयाल के सत शिष्य श्री निस्चल दास जी महाराज ! निश्चल दास जी ने विचार सागर नाम का ग्रन्थ लिखा है अपनी जाटू भाषा में ! ब्रह्मज्ञान का जिज्ञासु ही उस महान ग्रन्थ का महत्त्व जान सकता है! संत श्री आसारामजी बापू के श्री मुख से सुना था कि स्वामीजी की पंचदशी ने ब्रह्म अनुभव में बड़ा सहयोग दिया ! पंचदशी विचार सागर ग्रन्थ का ही हिस्सा है!निश्चल दास जी महाराज ने श्री विचार सागर की शुरुआत इन ५ दोहों से की है (१) जो सुख नित्य प्रकाश विभु ,नाम रूप आधार ! मति ना लखे जिहिं मति लखे ,सो मैं शुद्ध अपार!! (२) अब्धि अपार स्वरूप मम,लहरी विष्णु महेश ! विधि रवि चंदा वरूण यम,शक्ति धनेश गणेश !! (३) जा कृपालु सर्वज्ञ को , हिय धारत मुनि ध्यान ! ताको होत उपाधि तेँ, मो में मिथ्या भान !! (४) व्हे जिहिं जाने बिन जगत ,मनहुँ जेवरी सांप ! नसे भुजंग जग जिहिं लहै, सोहम आपे आप !! (५) बोध चाहे जाको सुकृति ,भजत राम निष्काम ! सो मेरा है आत्मा ,काकू करूँ प्रणाम !! अगर आप को जाटू भाषा नहीं आती तो भी इस ग्रन्थ को बड़ी आसानी से साझा जा सकता है! भाषा बहुत ही सरल है! इस ग्रन्थ का कितना महत्त्व है इसका सयम श्री निस्चल दास जी हम सब को जना रहे हैं :==" कविजन कृत भाषा बहुत ,ग्रन्थ जगत विख्यात ! बिन विचारसागर लखे, नहीं संदेह नसात !!" अब मर्जी आप की !

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